नई दिल्ली। दिल्ली में दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और स्वतंत्र पत्रकार नफीसा खान के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने के मामले को लेकर इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (IJA) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन ने घटना की निंदा करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक सेराज अहमद कुरैशी ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकार समाज का आईना होता है। वह सत्ता और प्रशासन से सवाल पूछने के साथ जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का काम करता है।
पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की आवाज पर हमला
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि पत्रकार को डराना, धमकाना या उसके साथ मारपीट करना केवल किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने वाला विषय है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। यदि कोई पत्रकार अपने पेशेगत दायित्व के तहत किसी व्यवस्था, अधिकारी या संस्था से सवाल करता है तो उसका जवाब कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर दिया जाना चाहिए, बल प्रयोग के जरिए नहीं।
महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर जताई चिंता
IJA के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि शाहीन खान 4 पीएम न्यूज नेटवर्क से जुड़ी महिला पत्रकार हैं, जबकि नफीसा खान स्वतंत्र पत्रकार हैं। उनके अनुसार, किसी भी महिला के साथ दुर्व्यवहार, अभद्रता अथवा मारपीट की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना समाज के साथ-साथ कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भी जिम्मेदारी है।
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा, “अगर लोकतंत्र की आवाज उठाने वाली महिला पत्रकार ही अपने कर्तव्य के दौरान सुरक्षित नहीं रहेंगी, तो आम महिला की सुरक्षा का विश्वास कैसे कायम होगा?”
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
पत्रकार सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित न रहे
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि देशभर में पत्रकारों पर हमले, धमकियां, मुकदमे, दबाव और उत्पीड़न की शिकायतें पत्रकारिता के सामने बड़ी चुनौती हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बनाई जाने वाली व्यवस्थाएं केवल घोषणाओं और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।
उनके मुताबिक, पत्रकार जब किसी खबर के लिए सड़क पर निकलता है तो वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए काम कर रहा होता है। वह भ्रष्टाचार, अपराध, अन्याय और शोषण जैसे मुद्दों को सामने लाने का प्रयास करता है।
पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर समझौता नहीं
IJA अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है। पत्रकारों को बिना भय और दबाव के अपना काम करने का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ता किसी की भी हो, पत्रकार का काम सवाल पूछना है और पत्रकारिता का दायित्व तथ्यों को जनता के सामने रखना है। किसी खबर या सवाल पर आपत्ति होने की स्थिति में कानून का रास्ता अपनाया जा सकता है, लेकिन हिंसा, धमकी और दबाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं हैं।
मानवाधिकारों की रक्षा की अपील
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। पत्रकार भी सबसे पहले एक नागरिक है और उसके अधिकारों की रक्षा करना राज्य तथा समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, “वर्दी कानून और अधिकार की प्रतीक है, भय और हिंसा की नहीं। पुलिस जनता की रक्षक है और पत्रकार जनता की आवाज। दोनों के बीच टकराव नहीं, बल्कि कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप संवाद होना चाहिए।”
पत्रकारों के साथ खड़ी है इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन
सेराज अहमद कुरैशी ने कहा कि इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन देश के किसी भी हिस्से में पत्रकारों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आवाज उठाती रहेगी।
उन्होंने कहा कि शाहीन खान और नफीसा खान अकेली नहीं हैं तथा पत्रकार समाज उनके साथ खड़ा है। पत्रकारों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
उन्होंने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने तथा दोनों महिला पत्रकारों को न्याय और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।
पत्रकारों से एकजुट रहने की अपील
अंत में सेराज अहमद कुरैशी ने देशभर के पत्रकारों से किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकने और एक-दूसरे के अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है और पत्रकारों को अपने पेशेगत दायित्वों का निर्वहन संविधान एवं कानून के दायरे में निर्भीकता से करते रहना चाहिए।










