इटवा में डॉ. भास्कर शर्मा ने फैटी लिवर को लेकर दी महत्वपूर्ण जानकारी
सिद्धार्थनगर। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण फैटी लिवर रोग तेजी से बढ़ रहा है। यह जानकारी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सहित सैकड़ों राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. भास्कर शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
उन्होंने इटवा में 09 जून 2026 को बताया कि लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो रक्त को शुद्ध करने, पाचन में सहायता करने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने का कार्य करता है। जब लिवर की कोशिकाओं में अत्यधिक वसा जमा होने लगती है तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। यदि लिवर के वजन का पांच प्रतिशत से अधिक हिस्सा वसा से भर जाए तो यह गंभीर स्थिति मानी जाती है।
फैटी लिवर के दो प्रमुख प्रकार
1. गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (NAFLD)
यह रोग सामान्यतः मोटापा, मधुमेह, इंसुलिन प्रतिरोध और उच्च कोलेस्ट्रॉल के कारण विकसित होता है। इसके अंतर्गत साधारण फैटी लिवर और नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) जैसी स्थितियां शामिल हैं, जो आगे चलकर सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण बन सकती हैं।
2. अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (AFLD)
अत्यधिक शराब सेवन के कारण होने वाला यह रोग लिवर में सूजन, पीलिया, पेट दर्द और गंभीर मामलों में लिवर सिरोसिस जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकता है।
क्या हैं फैटी लिवर के प्रमुख लक्षण
डॉ. शर्मा के अनुसार शुरुआती चरण में रोग के लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते। हालांकि थकान, भूख में कमी, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन, वजन घटना, जी मिचलाना, पेट फूलना और त्वचा या आंखों का पीला पड़ना इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
खानपान और जीवनशैली में सुधार है जरूरी
उन्होंने बताया कि पालक, लौकी, कद्दू, पपीता, सेब, अमरूद, ओट्स, ब्राउन राइस, ज्वार और बाजरा जैसे खाद्य पदार्थ लाभकारी हैं। वहीं शराब, धूम्रपान, कोल्ड ड्रिंक, अधिक चीनी, मैदा, तली-भुनी वस्तुएं और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनानी चाहिए। नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण भी आवश्यक है।
जांच और होम्योपैथिक उपचार
फैटी लिवर की पहचान के लिए अल्ट्रासाउंड, लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), फाइब्रोस्कैन तथा आवश्यकता पड़ने पर बायोप्सी कराई जाती है। डॉ. शर्मा ने बताया कि रोगी के लक्षणों और शारीरिक प्रकृति के अनुसार चेलिडोनियम मैजुस, कार्डुअस मारिएनस, लाइकोपोडियम, नक्स वोमिका, कैल्केरिया कार्बोनिका तथा फॉस्फोरस जैसी होम्योपैथिक औषधियां उपयोगी हो सकती हैं।
चिकित्सकीय सलाह आवश्यक
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की दवा का सेवन स्वयं न करें। फैटी लिवर के उपचार और दवा चयन के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।