आपकी हड्डी कमजोर हो रही है? इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज | Bones Health Tips

सिद्धार्थनगर। हड्डियां मनुष्य के शरीर को एक सुंदर कद-काठी, सही आकार और मजबूती प्रदान करती हैं। हमारे शरीर की सभी 206 हड्डियों का अपना एक विशेष और निर्धारित कार्य होता है। यदि ये हड्डियां अंदर से कमजोर हो जाएं, तो उठने-बैठने में तकलीफ से लेकर फ्रैक्चर तक की गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। आज के समय में खराब जीवनशैली और पोषण की कमी के कारण हड्डियों की बीमारियां (Bones Diseases) तेजी से बढ़ रही हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इटवा में कार्यरत प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने एक विशेष भेंटवार्ता में हड्डियों की कमजोरी, उनके कारणों और लक्षणों पर विस्तार से प्रकाश डाला है। डॉ. चौधरी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में भी अपनी लंबी सेवाएं दे चुके हैं।

हड्डियों की प्रमुख बीमारियां और उनके प्रकार (Common Bone Diseases)

डॉ. सुनील कुमार चौधरी के अनुसार, चिकित्सा विज्ञान में हड्डियों के कमजोर होने और उनके विकारों को मुख्य रूप से इन श्रेणियों में देखा जाता है:

  1. ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis): इसे आम भाषा में हड्डियों का पतला या खोखला होना कहते हैं। इसमें हड्डियों का घनत्व (Bone Density) इतना कम हो जाता है कि मामूली चोट से भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
  2. रिकेट्स (Rackets): यह मुख्य रूप से बच्चों में होने वाली बीमारी है, जिसमें विटामिन डी की भारी कमी के कारण बच्चों की हड्डियां बेहद कमजोर और लचीली होकर मुड़ने लगती हैं।
  3. ऑस्टियोमाइलाइटिस (Osteomyelitis): यह हड्डियों में होने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल या फंगल संक्रमण (Infection) है, जो हड्डियों को अंदर से नुकसान पहुंचाता है।
  4. ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis): यह गठिया (Arthritis) का सबसे आम रूप है। इसमें जोड़ों के बीच की उपास्थि (Cartilage) समय के साथ घिस जाती है, जिससे हड्डियों के बीच आपसी घर्षण होने लगता है और असहनीय दर्द होता है।
  5. एंकिलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing Spondylitis): यह भी एक प्रकार का गठिया है जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी (Spine) और शरीर के बड़े जोड़ों को प्रभावित करता है। इससे रीढ़ की कशेरुक आपस में जुड़ने लगती हैं और पीठ में जकड़न आ जाती है।

हड्डियां कमजोर होने के मुख्य कारण (Causes of Weak Bones)

डॉ. चौधरी ने बताया कि हड्डियों के कमजोर होने के पीछे कई शारीरिक और बाहरी कारण हो सकते हैं, जिनमें मुख्य हैं:

  • कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी: भारतीय खानपान में कैल्शियम और धूप से मिलने वाले विटामिन-डी की कमी इसका सबसे बड़ा कारण है।
  • उम्र का बढ़ना: बढ़ती उम्र के साथ प्राकृतिक रूप से बोन डेंसिटी कम होने लगती है।
  • आनुवंशिकी (Genetics): यदि परिवार में पहले से किसी को ऑस्टियोपोरोसिस या गठिया की शिकायत रही हो।
  • दवाओं का अत्यधिक सेवन: बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक स्टेरॉयड या भारी दवाओं का सेवन करने से हड्डियां गलने लगती हैं।
  • शारीरिक निष्क्रियता: व्यायाम न करना और दिनभर बैठे रहने वाली जीवनशैली।

हड्डी कमजोर होने के शुरुआती लक्षण (Symptoms of Weak Bones)

वक्त रहते अगर इन लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो हड्डियों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है:

  • जोड़ों और हड्डियों में लगातार दर्द रहना: विशेषकर पीठ, कमर और घुटनों में लगातार सुस्ती भरा दर्द होना।
  • फ्रैक्चर का खतरा बढ़ना: मामूली सी ठोकर लगने या गिरने पर भी हड्डी का टूट जाना या हेयरलाइन फ्रैक्चर आना।
  • शारीरिक कमजोरी और सुस्ती: शरीर में हमेशा थकान महसूस होना और सीधा खड़े होने में रीढ़ की हड्डी पर दबाव बनना।
  • पकड़ (Grip) कमजोर होना: हाथों की पकड़ का ढीला पड़ना भी कमजोर हड्डियों का एक शुरुआती संकेत हो सकता है।

हड्डियों को मजबूत बनाने के उपाय और निवारण (Prevention & Treatment)

कमजोर हड्डियों के उपचार और उन्हें दोबारा फौलादी बनाने के लिए डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं:

1. संतुलित और कैल्शियम युक्त आहार

अपने दैनिक भोजन में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, रागी और सोयाबीन जैसी चीजों को शामिल करें, जो कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं।

2. विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा

सुबह की हल्की धूप में 15-20 मिनट बैठें। यदि शरीर में विटामिन-डी का स्तर बहुत कम है, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन-डी3 के सप्लीमेंट्स (Sachets या Capsules) का कोर्स जरूर पूरा करें।

3. नियमित व्यायाम और योग

हड्डियों की मजबूती के लिए वेट-बियरिंग एक्सरसाइज जैसे- पैदल चलना, जोगिंग करना और हल्के व्यायाम बेहद जरूरी हैं। इससे हड्डियों की रीमॉडेलिंग बेहतर होती है।

4. चिकित्सकीय परामर्श और सर्जरी

यदि समस्या गंभीर स्टेज पर पहुंच चुकी है, जोड़ों की कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुकी है या संक्रमण अधिक है, तो योग्य ऑर्थोपेडिक सर्जन से परामर्श लेकर उचित दवाओं का सेवन करें। कुछ बेहद गंभीर मामलों में सर्जरी (जैसे जॉइंट रिप्लेसमेंट) के द्वारा भी इन बीमारियों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

डॉक्टर का परिचय (Medical Reviewer & Expert Profile)

चिकित्सकीय समीक्षा (Reviewed By): डॉ. सुनील कुमार चौधरी (MS – Orthopedics, Surgeon) डॉ. सुनील कुमार चौधरी वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इटवा में वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे पूर्व वे लखनऊ के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में भी बतौर कंसलटेंट कार्यरत रह चुके हैं। उन्हें हड्डियों के जटिल ऑपरेशनों, जोड़ों के दर्द (Gout & Arthritis) और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों के इलाज में व्यापक अनुभव प्राप्त है।

पाठकों के लिए विशेष नोट: प्रिय पाठकों, अगर हड्डियों की बीमारी, जोड़ों के दर्द या कैल्शियम की कमी से संबंधित आपका कोई भी व्यक्तिगत सवाल है, तो आप हमें सीधे हमारी आधिकारिक मेल आईडी letters@newsuniversal.in पर भेज सकते हैं या नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। अगले लेख में डॉ. सुनील कुमार चौधरी द्वारा आपके सवालों के वैज्ञानिक और सटीक जवाब दिए जाएंगे।

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डॉ. निसार अहमद खां

M.A. M.J.M.C. विगत 20 वर्षाें से पत्रकारिता क्षेत्र से जुडकर समाचार संकलन, लेखन, सम्पादन का कार्य जारी है। शिक्षा, राजनीति व ग्रामीण पत्रकरिता पर विशेष रिपोर्टिंग।

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